जैविक खेती में बायोगैस स्लेरी का फायदा
जैविक खेती में बायोगैस स्लेरी का सबसे बड़ा जैविक खेती में योगदान है। ग्रामीण इलाके में खेती के लिए वरदान है जो मुक्त गैस रसोई बनाने के लिए जो गोबर से बनाई जाती हैं और जो वेस्ट बच जाता हैं इसे स्लरी के रूप प्राप्त होते जो जैविक खाद्य के रूप में खेती के उपयोग में सीधा लिया जाता है।
आप पिचर में देख सकते है कि हमने बायोगैस बनाने के लिए एक ड्रम का उपयोग किया है।
१) गोबर गैस क्या है?
२) बायोसलरी क्या है?
३) आर्थिक ओर पर्यावरण लाभ?
बायो गैस क्या हैं?
गोबर गैस जिसे बायोगैस से भी जाना जाता हैं यह एक स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त ईंधन है। बायोगैस में मुख्य रूप से मिथेन गैस ओर कार्बन डाइऑक्साइड होने से इसे ईंधन के रूप में रसोई घर में भोजन को पका ने के रूप में इस्तेमाल किया जाता हैं।
लाभ: इससे रसोई घर में धुएं से छुटकारा ओर पर्यावरण सुरक्षित रहता हैं।
बायो स्लरी क्या हैं?
बायो स्लरी जिसे जैविक खाद्य के रूप में भी जाना जाता है। बायो स्लरी एक बायोगैस से बचने वाला गिला गाढ़ा पदार्थ को बायो स्लरी कहा जाता है। रासायनिक खाद की तुलना में यह मिट्टी के लिए अत्यधिक लाभदायक ओर मिट्टी की गुणवत्ता को बढ़ता है।
इसमें मुख्य रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते है। गोबर में पाचन क्रिया के उच्च तापमान ओर ऑक्सीजन की कमी के कारण हानिकारक बैक्टीरिया, कीड़े ओर खरपतवार के बीज पूरी तरह नष्ट हो जाता हैं।
केचवा खाद बनाने के लिए उत्तम स्लरी माना जाता है जिससे बनने वाला खाद को काला सोना भी कहा जाता है।
आर्थिक ओर पर्यावरण लाभ
किसान आर्थिक रूप से जैविक खाद्य को सुखाकर या केचवा खाद बनाकर बाजार में कम से कम रुपए में बिक्री कर के कमाई कर सकता है। बाजार में मिलने वाले महंगे खाद जैसे यूरिया, डीएपी जैसे खाद ओर LPG गैस पर होने वाला खर्च से छुटकारा मिलता हैं।
वर्मिकम्पोज मिट्टी की जलधारा क्षमता को बढ़ाती है और उसे बंजर होने से बचाती है।